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अपद्रव्यी अर्धचालक किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार के होते हैं? नाम लिखिए। P-N संधि के निर्माण के समय होने वाली प्रक्रियाओं को समझाइए।

P-N संधि की अवक्षय परत की चौड़ाई 1 माइक्रो मीटर एवं रोधिका विभव 0.7 वोल्ट है तो संधि पर उत्पन्न विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।

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ApprovedApproved Tutor Answer10 Months ago

अपद्रव्यी अर्धचालक वे पदार्थ होते हैं जिनमें विद्युत चालकता की विशेषताएँ होती हैं, लेकिन ये पूर्ण रूप से चालक नहीं होते। इनकी चालकता को बढ़ाने के लिए इनमें कुछ अपद्रव्य मिलाए जाते हैं।

अपद्रव्यी अर्धचालक के प्रकार

  • N-प्रकार: इसमें इलेक्ट्रॉनों की अधिकता होती है।
  • P-प्रकार: इसमें होल्स (खाली स्थान) की अधिकता होती है।

P-N संधि की प्रक्रिया

P-N संधि का निर्माण तब होता है जब N-प्रकार और P-प्रकार अर्धचालक को एक साथ रखा जाता है। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:

  1. दो अलग-अलग अर्धचालकों का चयन करना।
  2. उन्हें एक साथ जोड़ना, जिससे इलेक्ट्रॉनों और होल्स का आदान-प्रदान होता है।
  3. इस आदान-प्रदान के कारण एक अवक्षय परत बनती है, जो विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करती है।

विद्युत क्षेत्र की गणना

यदि P-N संधि की अवक्षय परत की चौड़ाई 1 माइक्रो मीटर (1 x 10-6 मीटर) है और रोधिका विभव 0.7 वोल्ट है, तो विद्युत क्षेत्र (E) की गणना निम्नलिखित सूत्र से की जा सकती है:

E = V/d

जहाँ:

  • V = रोधिका विभव (0.7 वोल्ट)
  • d = अवक्षय परत की चौड़ाई (1 x 10-6 मीटर)

इसलिए, विद्युत क्षेत्र:

E = 0.7 / (1 x 10-6) = 7 x 105 वोल्ट/मीटर

इस प्रकार, P-N संधि पर उत्पन्न विद्युत क्षेत्र 7 x 105 वोल्ट/मीटर है।