ट्रांसफॉर्मर एक विद्युत यंत्र है जो एक सर्किट से दूसरे सर्किट में विद्युत ऊर्जा को बिना किसी यांत्रिक संपर्क के स्थानांतरित करता है। यह मुख्य रूप से दो कुंडलियों (कोइल्स) का उपयोग करता है, जिन्हें प्राथमिक और द्वितीयक कुंडली कहा जाता है। ट्रांसफॉर्मर का सिद्धांत विद्युत चुंबकीय प्रेरण पर आधारित है।
ट्रांसफॉर्मर का सिद्धांत
जब प्राथमिक कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो यह एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। यह चुंबकीय क्षेत्र द्वितीयक कुंडली के चारों ओर से गुजरता है, जिससे उसमें विद्युत धारा उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया को विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहा जाता है।
ट्रांसफॉर्मर के प्रकार
- उच्च वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर: इसे वोल्टेज को बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है।
- निम्न वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर: इसका उपयोग वोल्टेज को कम करने के लिए किया जाता है।
- आइसोलेशन ट्रांसफॉर्मर: यह सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे विद्युत धारा का आइसोलेशन होता है।
सिद्धांत का प्रमाण
ट्रांसफॉर्मर के सिद्धांत को निम्नलिखित समीकरणों से समझा जा सकता है:
- प्राथमिक वोल्टेज (Eₛ) और द्वितीयक वोल्टेज (Eₚ) के बीच का संबंध: Eₛ/Eₚ = Nₛ/Nₚ
- प्राथमिक धारा (Iₚ) और द्वितीयक धारा (Iₛ) के बीच का संबंध: Iₚ/Iₛ = Nₛ/Nₚ
यहाँ, k ट्रांसफॉर्मर का परिणमन अनुपात है, जो प्राथमिक और द्वितीयक कुंडलियों के रोटेशन की संख्या के अनुपात को दर्शाता है। इस प्रकार, Eₛ = Eₚ = Iₚ = k का सिद्धांत सही है, क्योंकि यह ट्रांसफॉर्मर के कार्यप्रणाली को स्पष्ट करता है।